छत्तीसगढ़

PSSOU के दो MOU से खुले सहयोग के नए रास्ते, शिक्षा-शोध के साथ जनजातीय अध्ययन को मिलेगा विस्तार

बिलासपुर, 17 सितंबर 2026। पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने अकादमिक और अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय ने महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बिलासपुर और ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर, नई दिल्ली (TRKC) के साथ सहयोग का समझौता किया है। इन समझौतों से शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ जनजातीय विषयों पर संयुक्त अध्ययन एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अकादमिक सहयोग को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए MOU के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार गतिविधियों और संस्थागत विकास के क्षेत्र में सहयोग करेंगे। संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान, अकादमिक कार्यक्रम, अंतर्विषयी अध्ययन तथा पाठ्यचर्या संवर्धन जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही MOOC, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास और सह-विकास की दिशा में भी काम किया जा सकेगा। सक्षम प्राधिकारियों की स्वीकृति के अधीन प्रमाणपत्र, अल्पकालिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की संभावनाएं भी रखी गई हैं।

शोध और विद्यार्थियों के लिए बढ़ेंगे अवसर

MOU के तहत संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित अनुसंधान, परामर्श, संयुक्त प्रकाशन और शोध प्रसार जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। संकाय विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान, अकादमिक यात्राओं और श्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं के आदान-प्रदान की दिशा में भी दोनों संस्थान सहयोग कर सकेंगे।

विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन, उद्यमिता और प्लेसमेंट-तत्परता से जुड़े अवसर विकसित किए जा सकेंगे। प्रवेश, क्रेडिट ट्रांसफर, संयुक्त अथवा द्वैध उपाधि जैसे विषय संबंधित UGC एवं सक्षम प्राधिकरणों के नियमों और संस्थागत स्वीकृति के अधीन रहेंगे।

TRKC के साथ जनजातीय विषयों पर होगा संयुक्त अध्ययन

ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर, नई दिल्ली (TRKC) के साथ हुए समझौते में जनजातीय मुद्दों एवं अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन और अनुसंधान को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन, ज्ञान-साझाकरण और आपसी सहमति से निर्धारित अन्य गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी।

TRKC की ओर से जनजातीय विषयों पर रणनीति निर्माण, योजना तैयार करने और कार्य-रोडमैप विकसित करने में बौद्धिक सहयोग तथा आवश्यकतानुसार विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। विश्वविद्यालय अपनी संस्थागत प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्धारित गतिविधियों के आयोजन में सहयोग करेगा।

दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय

TRKC के साथ हुए समझौते के तहत प्रस्तावित गतिविधियों की निगरानी और समन्वय के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति गठित करने का प्रावधान किया गया है। बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण से जुड़े विषय संबंधित गतिविधि की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।

रजिस्ट्रार चंद्रभूषण मिश्र ने किए हस्ताक्षर

विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। वहीं ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर, नई दिल्ली (TRKC) की ओर से छत्तीसगढ़ के प्रान्त संयोजक श्री राजीव शर्मा ने MOU पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान दोनों संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत, कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र, महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी एवं कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक सहित संबंधित प्रतिनिधि मौजूद रहे। TRKC की ओर से छत्तीसगढ़ के प्रान्त संयोजक श्री राजीव शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता श्री वैभव सुरंगे भी उपस्थित थे।

जनजातीय समाज पर शोध को मिलेगा संस्थागत आधार

विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों MOU का उद्देश्य संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों का साझा उपयोग करते हुए विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर विकसित करना है। विशेष रूप से TRKC के साथ समझौते के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों से जुड़े अध्ययन एवं शोध को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का आधार तैयार होगा।

शिक्षा से लेकर अनुसंधान और जनजातीय अध्ययन तक सहयोग का यह विस्तार PSSOU के लिए अकादमिक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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