महानदी विवाद पर दिल्ली में निर्णायक मंथन, साय-माझी के साथ अमित शाह की बैठक में समाधान की राह तलाशने पर जोर
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर गुरुवार को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हिस्सा लिया। दोनों राज्यों के बीच जल विवाद के समाधान के लिए संवाद, तकनीकी आकलन और आपसी सहमति के आधार पर आगे बढ़ने पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों सहित जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
‘दोनों राज्यों की जीत वाला समाधान’ चाहता है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी को दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण नहीं, बल्कि सहयोग और विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे समाधान की आवश्यकता बताई जिसमें किसी राज्य की हार न हो और दोनों राज्यों के हित सुरक्षित रहें।
साय के मुताबिक छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और टिकाऊ समाधान के पक्ष में है। उनका कहना है कि समाधान में किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
महानदी के जलग्रहण क्षेत्र का भी रखा पक्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में है और इसका आधे से अधिक जलग्रहण क्षेत्र राज्य में आता है। ऐसे में प्रदेश के किसानों, सिंचाई व्यवस्था और आदिवासी क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को समाधान में उचित स्थान मिलना चाहिए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा के हितों के प्रति छत्तीसगढ़ की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके हितों का सम्मान करते हुए सहयोग की भावना से आगे बढ़ेगा।
महानदी जल विवाद को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के रुख से जुड़ी जानकारी यहां देखें।
CWC के वैज्ञानिक आकलन पर भरोसा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल आयोग के वैज्ञानिक और पारदर्शी तकनीकी आकलन पर भरोसा है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों राज्यों के परामर्श से सामने आने वाले समाधान को सकारात्मक भावना के साथ आगे बढ़ाने में छत्तीसगढ़ सहयोग करेगा।
जुलाई 2026 में भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई थी। उस बैठक में बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया था। PIB के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी समाधान की प्रक्रिया में भाग लिया था।
20 सितंबर की मुलाकात के बाद बढ़ी बातचीत
महानदी विवाद को लेकर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हाल के दिनों में सीधे संवाद भी बढ़े हैं। 20 सितंबर को भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच इस पुराने विवाद के समाधान को लेकर बातचीत आगे बढ़ी।
इससे पहले दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों और केंद्रीय जल आयोग से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर भी तकनीकी चर्चा हुई है। अब दिल्ली की उच्चस्तरीय बैठक को इसी संवाद प्रक्रिया की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
कई वर्षों से जारी है महानदी जल विवाद
महानदी के जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। ओडिशा ने छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में बने बैराजों और जल संरचनाओं को लेकर आपत्तियां उठाई हैं। विवाद का समाधान कराने के लिए वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।
अब केंद्र की पहल, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच संवाद और केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी प्रक्रिया के बीच विवाद के समाधान को लेकर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। बैठक में दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहमति का रास्ता तलाशने पर जोर दिया गया।
महानदी का पानी सिर्फ दो राज्यों का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों किसानों, सिंचाई व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा विषय है। ऐसे में अब आगे होने वाली तकनीकी और राजनीतिक बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।



